संज्ञा किसे कहते हैं? (Sangya kise kahate hain)
भाषा के हर शब्द का एक अर्थ और एक पहचान होती है। हिंदी व्याकरण में ‘संज्ञा’ वह शब्द है जो किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भावना के नाम को प्रकट करता है। उदाहरण के तौर पर राम, दिल्ली, पुस्तक, प्रेम सभी संज्ञा शब्द हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संज्ञा के बिना भाषा अधूरी है क्योंकि यह हर वाक्य की नींव रखती है।
भाषा वैज्ञानिक डॉ. पुष्पा दीक्षित बताती हैं, “संज्ञा शब्द हमारी सोच को आकार देता हैं। हर वस्तु को पहचान देने का काम संज्ञा करती है, इसलिए यह व्याकरण का पहला और सबसे ज़रूरी घटक माना जाता है।”
संज्ञा की परिभाषा (Sangya ki Paribhasha)
हिंदी व्याकरण की परिभाषा के अनुसार — “जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम का बोध कराए, उसे संज्ञा कहते हैं।”
जैसे — गंगा, पुस्तक, प्रेम, बच्चा, पर्वत आदि। यह शब्द केवल नाम नहीं बताते, बल्कि किसी वस्तु या व्यक्ति के अस्तित्व का भी बोध कराते हैं।
संज्ञा के प्रकार
भाषाविदों ने संज्ञा को चार मुख्य प्रकारों में बाँटा है:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun): जैसे राम, दिल्ली, गंगा।
- जातिवाचक संज्ञा (Common Noun): जैसे लड़का, शहर, नदी।
- भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun): जैसे खुशी, प्रेम, दुःख।
- समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun): जैसे सेना, झुंड, टोली।
भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि संज्ञा के इन वर्गों को समझना छात्रों के लिए ज़रूरी है क्योंकि यही व्याकरण की जड़ है, जिससे आगे सर्वनाम, विशेषण और क्रिया जैसे भेद निकलते हैं।
भाषा में संज्ञा का महत्व
संज्ञा सिर्फ़ किताबों में पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि हमारी दैनिक बातचीत का हिस्सा है। जब हम कहते हैं — “रवि स्कूल गया”, तो रवि (व्यक्तिवाचक संज्ञा) और स्कूल (जातिवाचक संज्ञा) दोनों ही संज्ञा हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों में भाषा की समझ बढ़ाने के लिए उन्हें संज्ञा के उदाहरण रोज़मर्रा के जीवन से सिखाना चाहिए, जैसे — फल, मोबाइल, भारत, शिक्षक आदि।
शिक्षकों का कहना है कि यह तरीका बच्चों में उत्सुकता बढ़ाता है और हिंदी के व्याकरण को आधुनिक रूप देता है।